अफगानिस्तान भूकंप 2025: तबाही, त्रासदी और उम्मीद की किरण

31 अगस्त 2025 की रात अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत नंगरहार और कुनार में धरती ने जबरदस्त झटका दिया। रिक्टर पैमाने पर 6.0 तीव्रता के इस भूकंप ने कुछ ही मिनटों में हजारों जिंदगियों को हिला दिया। मिट्टी और पत्थरों से बने घर पलभर में ढह गए और कई परिवार मलबे में दब गए।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत और 2,800 से ज्यादा घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। राहत एजेंसियाँ मान रही हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई गाँवों तक पहुँचना अभी भी संभव नहीं हो पाया है।


प्रत्यक्षदर्शियों की आँखों से त्रासदी

स्थानीय निवासी मोहम्मद अजीज ने मीडिया से कहा –

“हम सो रहे थे तभी ज़मीन ज़ोर से हिली। हमारी छत गिर गई। मैंने अपने दो बच्चों को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन मेरी पत्नी और माँ मलबे में दब गईं।”

दूसरे गाँव से एक महिला ने बताया –

“पूरा इलाका अंधेरे में डूबा था, लोग चीख रहे थे, बच्चे रो रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे क़यामत आ गई हो।”

इन गवाही से साफ है कि भूकंप ने केवल ढांचे ही नहीं गिराए, बल्कि हजारों परिवारों की ज़िंदगियाँ भी बर्बाद कर दी हैं।


प्रभावित क्षेत्र और ढांचागत तबाही

  • नंगरहार, कुनार और लगमान प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
  • ग्रामीण इलाकों में बने मिट्टी और पत्थर के मकान पूरी तरह ढह गए।
  • कई गाँवों तक जाने वाली सड़कें भूस्खलन और दरारों की वजह से बंद हो गईं।
  • बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है।

राहत और बचाव कार्य: चुनौतियाँ और प्रयास

  • 40 से अधिक हवाई उड़ानों द्वारा घायलों और मृतकों को नजदीकी अस्पतालों तक लाया गया।
  • तालिबान प्रशासन ने आपात राहत समिति गठित कर 100 मिलियन अफगानी की तत्काल सहायता की घोषणा की।
  • भारत, चीन, ईरान और संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय सहायता भेजने का वादा किया है। भारत ने 1,000 तंबू और 15 टन खाद्यान्न पहले ही रवाना कर दिया है।
  • बचाव दलों को बड़ी चुनौती यह है कि कई गाँव पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर बसे हैं, जहाँ गाड़ियाँ और हेलीकॉप्टर आसानी से नहीं पहुँच सकते।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • भारत: अफगानिस्तान को त्वरित राहत भेजने का निर्णय, मेडिकल टीम भी तैयार।
  • चीन: आर्थिक और तकनीकी सहायता का भरोसा।
  • ईरान: सीमावर्ती इलाकों से दवाइयाँ और डॉक्टर भेजे।
  • संयुक्त राष्ट्र: आपातकालीन फंड जारी करने और मानवीय एजेंसियों को सक्रिय करने की घोषणा।

लेकिन तालिबान सरकार के साथ अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में तनाव होने के कारण कई देश प्रत्यक्ष मदद देने से झिझक भी रहे हैं।


क्यों बार-बार आते हैं अफगानिस्तान में भूकंप?

अफगानिस्तान हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यहाँ भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट लगातार टकराती रहती हैं। यही वजह है कि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में:

  • जून 2022 – 6.2 तीव्रता का भूकंप, 1,000 से ज्यादा मौतें।
  • अक्टूबर 2023 (हेरात) – भूकंप से 1,500 से ज्यादा लोगों की जान गई।
  • और अब 2025 का यह ताजा हादसा, जिसने फिर से पूरे देश को शोक और संकट में डाल दिया।

आर्थिक और सामाजिक असर

  • हजारों परिवार बेघर हो गए हैं।
  • खेती की ज़मीनें और सिंचाई की नहरें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
  • अस्पतालों में भीड़ इतनी है कि मरीजों को फर्श पर इलाज करना पड़ रहा है।
  • शिक्षा संस्थान बंद हैं, बच्चे आघात से जूझ रहे हैं।

भविष्य की चुनौतियाँ और सबक

  1. भूकंप-रोधी निर्माण: मिट्टी के मकानों की जगह मजबूत इमारतों की जरूरत है।
  2. आपदा प्रबंधन प्रणाली: अफगानिस्तान में आधुनिक आपदा प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी प्रणाली का अभाव है।
  3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवीय सहायता पर ध्यान देना जरूरी है।
  4. स्थानीय प्रशिक्षण: ग्रामीणों को प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना होगा।

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