नई दिल्ली, 21 अगस्त 2025 – भारत में छोटे व्यापारियों (Small Sellers) और MSMEs के लिए त्यौहारों का मौसम केवल खुशियों का ही नहीं बल्कि सालाना कारोबार का सबसे अहम समय माना जाता है। इंडिया SME फोरम ने आज यह साफ कहा कि आने वाले कुछ हफ़्तों में होने वाली बिक्री ही करोड़ों छोटे कारोबारियों की “सर्वाइवल” तय करेगी। लेकिन अगर इस दौरान किसी भी तरह का अचानक नियमों में बदलाव या नई टैक्स पॉलिसी लागू हुई, तो यह लाखों डिजिटल-फ़र्स्ट बिज़नेस के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।
त्यौहारों का सीजन (फेस्टिव सीजन) आमतौर पर छोटे व्यापारियों की सालाना बिक्री का 35-40% हिस्सा कवर करता है। यही वजह है कि चाहे वह दिवाली हो, नवरात्रि हो या फिर दशहरा – हर छोटे-बड़े व्यापारी ने पहले से ही स्टॉक, इन्वेंट्री और लॉजिस्टिक्स में निवेश कर रखा है।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों है इतना अहम त्यौहारों का सीजन?
- छोटे विक्रेताओं की सालाना बिक्री का 35-40% हिस्सा त्यौहारों से आता है।
- आज 2.5 मिलियन (25 लाख से ज्यादा) छोटे कारोबारी अमेज़न, फ्लिपकार्ट और मेशो जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स पर ऑनलाइन प्रोडक्ट बेच रहे हैं।
- छोटे शहरों के कारोबारियों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से 2.5x से 3x तक ग्रोथ मिली है।
- त्यौहारों की तैयारी के लिए MSMEs पहले ही लाखों रुपये इन्वेंट्री और सप्लाई चेन में लगा चुके हैं।
नियमों में बदलाव से क्यों है खतरा?
इंडिया SME फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा:
“त्यौहारों से पहले अगर अचानक किसी भी तरह के नियम लागू होते हैं तो यह छोटे व्यापारियों को बर्बादी की कगार पर ला देगा। लाखों कारोबारी पहले ही सीमित संसाधनों के बावजूद इन्वेंट्री पर निवेश कर चुके हैं। सरकार के डिजिटल इंडिया विज़न को सफल बनाने में ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स की बड़ी भूमिका रही है। इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि किसी भी नई कंप्लायंस या GST बदलाव का ऐलान सोच-समझकर और सही समय पर किया जाए।”
इसके अलावा, GST स्लैब्स को लेकर असमंजस भी इस बार त्यौहारों की बिक्री को प्रभावित कर सकता है। अगर उपभोक्ताओं पर अचानक टैक्स का बोझ बढ़ता है तो उनकी खरीदारी क्षमता घटेगी और इसका सीधा असर लाखों कारोबारियों की आय पर पड़ेगा।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स ने दी छोटे कारोबारियों को नई पहचान
डिजिटल मार्केटप्लेस ने छोटे दुकानदारों और उद्यमियों को न सिर्फ़ देशभर में ग्राहकों तक पहुँचाया है, बल्कि उन्हें बड़े ब्रांड्स से मुकाबला करने का मौका भी दिया है। खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के कारोबारियों के लिए यह क्रांति साबित हुई है।
लक्ष्य क्वात्रा, फाउंडर – Luusa ने कहा:
“हमारे लिए त्यौहारों का मौसम साल का सबसे अहम समय है। किसी भी तरह की नीतिगत रुकावट सिर्फ हमारी आय पर असर नहीं डालेगी बल्कि उन सैकड़ों कारीगरों और छोटे मैन्युफैक्चरर्स की रोज़ी-रोटी पर भी संकट खड़ा कर देगी जो हमारी सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। भारतीय ब्रांड्स की ग्लोबल सफलता सरकार की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन नीतियों और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स से ही संभव हुई है।”
इसी तरह, अमितदीप बुढ़िराजा, मालिक – JustToyz, ने कहा:
“त्यौहारों से हमारी सालाना कमाई का लगभग आधा हिस्सा आता है। इसके लिए हम महीनों से तैयारी कर रहे हैं। अमेज़न जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स ने हमें देशभर के ग्राहकों तक पहुँचाया है। लेकिन अगर इसी समय नियमों में अचानक बदलाव होता है तो यह न सिर्फ हमारी बिक्री पर असर डालेगा, बल्कि डिजिटल मार्केटप्लेस पर भरोसा भी कम करेगा। इससे हज़ारों डिजिटल-फ़र्स्ट बिज़नेस सालों पीछे चले जाएँगे।”
क्या चाहता है इंडिया SME फोरम?
इंडिया SME फोरम का साफ संदेश है कि:
- छोटे कारोबारियों को और अधिक डिजिटल अवसर अपनाने चाहिए।
- लेकिन सरकार और नियामक संस्थाओं को चाहिए कि त्यौहारों जैसे अहम समय पर स्थिर नीतिगत माहौल (Stable Policy Environment) बनाए रखें।
- किसी भी नए नियम या टैक्स बदलाव का ऐलान ऐसे समय में न किया जाए जब कारोबारी पहले से इन्वेंट्री और निवेश में लगे हों।