“छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित गांव तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक गवाही बने। पहली बार आज़ादी के बाद इन इलाकों में राष्ट्रीय ध्वज लहराया गया। सुरक्षा बलों और प्रशासनिक प्रयासों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया और आज वे गर्व से तिरंगा फहरा रहे हैं।”
स्वतंत्रता के 79वें वर्ष में ऐतिहासिक बदलाव
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 29 नक्सल प्रभावित गाँवों ने इस बार स्वतंत्रता दिवस को ऐतिहासिक अंदाज़ में मनाया। आज़ादी के बाद पहली बार इन गाँवों में तिरंगा लहराया गया। दशकों से नक्सली प्रभाव झेल रहे इन इलाकों में पुलिस कैंप स्थापित किए जाने और विकास योजनाओं के ज़रिए अब माहौल बदल रहा है।
दशकों की नक्सली छाया के बाद बदला माहौल
बस्तर क्षेत्र के सात ज़िलों में लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का असर रहा है। नक्सली गाँवों में सरकार की गतिविधियों का विरोध करते हुए राष्ट्रीय त्योहारों पर काला झंडा फहराते थे और आज़ादी को “झूठी स्वतंत्रता” बताते थे। यही कारण था कि गाँववाले खुले तौर पर स्वतंत्रता दिवस समारोहों में शामिल नहीं हो पाते थे।
लेकिन पिछले दो वर्षों में हालात बदले हैं। लगातार सुरक्षा बलों की तैनाती, पुलिस कैंपों की स्थापना और विकास कार्यों ने ग्रामीणों के बीच भरोसे का वातावरण बनाया है।
जहाँ-जहाँ पहली बार लहराया तिरंगा
- नारायणपुर ज़िला: होरादी, गरपा, कछपाल, कोडलियार, कुटुल, बड़ेमाकोटी, पद्मकोट, कंदुलनार, नेलंगुर, पंगुर और रैनार
- सुकमा ज़िला: रायगुudem, तुमलपाड, गोलाकुंडा, गोमगुडा, मेट्टागुडा, उस्कावाया और मुलकाठोंग
- बीजापुर ज़िला: कोंडापल्ली, जीडापल्ली, वाटेबागु, कार्रगुट्टा, पिड़िया, गुञ्जे पार्टी, पुजारी, कांकेर, भीमराम, कोरचोली और कोटपल्ली
इन सभी गाँवों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक झंडारोहण किया और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में शामिल हुए।
सुरक्षा और विकास ने किया संभव
पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड, बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार इलाके में गश्त और अभियान चला रहे हैं। सुकमा एसपी किरण चौहान के अनुसार, अंदरूनी गाँवों में लगातार कैंप खोले जा रहे हैं, ताकि लोगों को सुरक्षा का एहसास हो।
इसके साथ ही राज्य सरकार की नेलनार योजना के तहत सड़कों का निर्माण, बिजली और मोबाइल टावर जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य बीजापुर, सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में विकास को तेज़ करना है।
नई सुबह की शुरुआत
यह घटना केवल झंडारोहण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि अब ग्रामीण नक्सलियों के डर से निकलकर राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। लंबे समय बाद इन गाँवों ने सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव किया।